झांसी (देवेश प्रताप सिंह राठौर): बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बुधवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ हिंदी विभाग के वृंदावन लाल वर्मा सभागार में किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रारंभ हुए इस अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय में आगामी एक माह तक सेवा, सामाजिक सहभागिता, स्वच्छता, नशामुक्ति और नवाचार से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने भी 17 सितंबर से विभिन्न सेवा एवं जनभागीदारी गतिविधियों की शुरुआत की है।
अपने उद्घाटन संबोधन में कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि सेवा का जन्म संवेदना से होता है। व्यक्ति के पास भौतिक संसाधन न भी हों, तो भी उसके पास संवेदनाएं होती हैं और उन्हीं संवेदनाओं की सार्थक अभिव्यक्ति सेवा है। उन्होंने कहा कि नर में नारायण का भाव रखकर की गई सेवा पूजा का स्वरूप ग्रहण कर लेती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य इस संसार में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। जन्म और मृत्यु के बीच मिलने वाला समय ही सृजन और सार्थक कर्म का समय है। यदि प्रत्येक नागरिक इस समय को सेवा से जोड़ दे तो विकसित भारत का संकल्प वास्तविकता में परिवर्तित हो सकता है।
प्रो.मुकेश पांडेय ने कहा कि सेवा के लिए केवल धन की आवश्यकता नहीं होती। श्रमदान, जरूरतमंदों को फल और वस्त्र वितरण, ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरण, रक्तदान, जल सेवा, स्वच्छता, वृक्षारोपण और समयदान भी सेवा के महत्वपूर्ण रूप हैं। जो व्यक्ति भौतिक रूप से सहयोग नहीं कर सकता, वह ज्ञानदान और शिक्षा के प्रसार के माध्यम से समाज की सेवा कर सकता है। उन्होंने प्रकृति का उदाहरण देते हुए कुलपति ने कहा कि वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और नदियां अपना जल स्वयं नहीं पीतीं। प्रकृति का प्रत्येक तत्व त्याग और सेवा का संदेश देता है। भारतीय वेद, पुराण और दर्शन में भी सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य माना गया है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती शौर्य, वीरता, त्याग और संस्कार के लिए विश्वभर में जानी जाती है। अब आवश्यकता है कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बुंदेलखंड की पहचान सेवा के क्षेत्र में भी स्थापित हो। उन्होंने कहा कि सेवा को संस्कार और संस्कार को कर्म से जोड़ने पर ही अपेक्षित सामाजिक परिवर्तन संभव होगा। कुलपति ने “ज्ञान से समाज में सेवा और सेवा से जनभागीदारी” के विकास मॉडल को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि सेवा किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी बढ़ने से सेवा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती है।
